बुधवार, 29 अगस्त 2018

✍🏻श्रम का साधक📝 श्रम का मैं साधक हूँ, जन-जन का पालक हूँ। भारत माँ के कृषक बेटा, गुरु धौम्य के उद्दालक हूँ।। हर मौसम का बयार हूँ, सावन का मैं फुहार हूँ। बसंत में बोले कोयल, उस आम का डाल हूँ। गगन के मल्हार मैं, श्रम का संचालक हूँ ॥1॥भारत माँ के..... माटी का मैं श्रृंगार हूँ, शोषण का अम्बार हूँ। अन्न के कण में बसे, पसीने की मैं धार हूँ ॥ गोपियों के प्रेम मैं, महाभारत के उद्घोषक हूँ ॥2।।भारत माँ के .... स्वतंत्रता का संग्राम हूँ, कौशल्या का श्रीराम हूँ। आजाद, भगतसिंह के, शान बान बलिदान हूँ ॥ मिट्टी के मधुर महक मैं, इतिहास का गायक हूँ ॥3॥ भारत माँ के कृषक...रचना✍🏻 सनुकलाल यादव ✍🏻


सोमवार, 8 जनवरी 2018

जिस-जिस से पथ पर स्नेह मिला, उस-उस राही को धन्यवाद

जीवन अस्थिर अनजाने ही, हो जाता पथ पर मेल कहीं,
सीमित पग डग, लम्बी मंज़िल, तय कर लेना कुछ खेल नहीं
दाएँ-बाएँ सुख-दुख चलते, सम्मुख चलता पथ का प्रमाद
जिस-जिस से पथ पर स्नेह मिला, उस-उस राही को धन्यवाद

साँसों पर अवलम्बित काया, जब चलते-चलते चूर हुई,
दो स्नेह-शब्द मिल गये, मिली नव स्फूर्ति, थकावट दूर हुई
पथ के पहचाने छूट गये, पर साथ-साथ चल रही याद
जिस-जिस से पथ पर स्नेह मिला, उस-उस राही को धन्यवाद....

नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाओं सहित...
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