मंगलवार, 27 जुलाई 2021
*भाषा मेरी हिंदी*
💐बसंत बयार💐
💐बसंत बयार💐
मुस्कुरा रहीं हैं कलियाँ,कोपलों की आड़ में ।
झूम रहीं हैं डालियाँ,मादक बसंत बयार में ।।
महुएँ की महक से,पवन मदहोश।
आम के झुरमुट से,कोयल का संघोष।
सुहानी भोर लाये,सौन्धीं किरण लाली ।
शबनम की बूंदो से,लदी गेंहूँ की बाली।
बलखा रहीं हैं नदियाँ,अमृत - सी धार ले....
झूम रहीं हैं डालियाँ,मादक बसंत बयार में ।।
सुहाना मौसम में,प्यारा मेरा गाँव ।
पायल की संगीत से,थीरके जहाॅ पाँव ।
टेशू के फूल से,पेड़ जो दहकता।
नयनाभिराम में,नज़र नहीं हटता।
झर रहीं पिचकारियाँ,राग मल्हार ले...
झूम रहीं हैं डालियाँ,मादक बसंत बयार में ।।
लदे वल्लरी फूल से,लगे जैसे हार ।
सौंधीं महक से,मचलता पहाड ।
चारों दिशाएँ आज,मस्त हैं मदमात।
पहुँची है देखो,बसंत की बारात।
रंगीन हो गई धरती,रंगो की बौछार में....
झूम रहीं हैं डालियाँ,मादक बसंत बयार में ।।
*रचनाकार*
✍🏻सनुक लाल यादव ✍🏻
✍🏻शिक्षा और संस्कार ✍🏻
राधा के मोहन
*राधा के मोहन*
राधा के मोहन कान्हा,
प्रेम के तुम सागर हो।
अखिल चराचर में समाए,
अमृत से भरे गागर हो।।
चौंसठ कलाओं का आधार,
गीता का विरासत हो।
कृष्णम् वंदे जगत गुरुम्,
महाभारत का सियासत हो।।
यशोदा के नन्दलाला,
देवकी के दुलारा हो।
मधुबन में रास रचाते,
गोपियों के ग्वाला हो।।
सूर के मधुर संगीत,
मीरा के वीणा तार हो।
योगियों की भक्ति तुम,
प्रेमियों के श्रृंगार हो।।
ब्रह्मांड के अधिष्ठाता तुम,
चराचर के स्वामी हो।
तुम ही तो एक हो मोहन,
सभी के उर अंतर्यामी हो।।
✍🏻रचना - सनुक लाल यादव,
बालाघाट मध्य प्रदेश
कविता
-शिक्षा के नवदीप-
भोर भई अब उठो चलो,हो जाओ तैयार ।
शिक्षा के नवदीप जलायें, मिलकर एक बार ।।
ये भारत की माटी चंदन,यहां पावन धाम है ।
राम रहीम ईशा गुरु,गोविंद जैसे नाम है।।
भाईचारा स्नेह सहोदर,इसकी तो पहचान है।
रंग बिरंगी है संस्कृति, रंगीन यहां परिधान है।।
भिन्नता लिए मौसम चार,आए बार-बार........
शिक्षा के नवदीप जलायें, मिलकर एक बार ।।
नर्मदा क्षिप्रा गंगा यमुना,पावन इनका जल है।
अमृतमयी धारा इनकी,निर्झर बहती कल कल है।।
सोंधी खुशबू लिये हवा,बावन चले बयार है ।
स्वागत को तैयार लताएं,लिए फूलों के हार है।।
रामकृष्ण की पावन भूमि,नित होता वेदोंच्चार....
शिक्षा के नवदीप जलायें, मिलकर एक बार ।।
मंदिर मस्जिद गिरजाघर,या हो गुरुद्वार।
गीता कुरान बाइबिल,गुरु ग्रंथ का प्रचार।।
खून का रंग एक ही,सबमें एक जान है।
मिलकर बोलो एक बार,भारत मेरा महान है।।
सदाचार और सद्विचार का,नित करें प्रचार...
शिक्षा के नवदीप जलाएं,मिलकर एक बार।