चाँदनी रात मेँ एक शर्मिली सी किरण। आँख मिचौली करती बादल के ओट मे जा छुपी॥ हम ढ़ूढ़ते रह गये इधर-उधर सारे जहाँ मेँ। हमें आज तक तलाश है परन्तु मिल न सकी॥ ॰सनुक यादव
चाँदनी रात मेँ एक शर्मिली सी किरण। आँख मिचौली करती बादल के ओट मे जा छुपी॥ हम ढ़ूढ़ते रह गये इधर-उधर सारे जहाँ मेँ। हमें आज तक तलाश है परन्तु मिल न सकी॥ ॰सनुक यादव
चाँदनी रात मेँ एक शर्मिली सी किरण। आँख मिचौली करती बादल के ओट मे जा छुपी॥ हम ढ़ूढ़ते रह गये इधर-उधर सारे जहाँ मेँ। हमें आज तक तलाश है परन्तु मिल न सकी॥ ॰सनुक यादव
चाँदनी रात मेँ एक शर्मिली सी किरण। आँख मिचौली करती बादल के ओट मे जा छुपी॥ हम ढ़ूढ़ते रह गये इधर-उधर सारे जहाँ मेँ। हमें आज तक तलाश है परन्तु मिल न सकी॥ ॰सनुक यादव
जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरियसी।
जवाब देंहटाएंचाँदनी रात मेँ एक शर्मिली सी किरण।
जवाब देंहटाएंआँख मिचौली करती बादल के ओट मे जा छुपी॥
हम ढ़ूढ़ते रह गये इधर-उधर सारे जहाँ मेँ।
हमें आज तक तलाश है परन्तु मिल न सकी॥
॰सनुक यादव
चाँदनी रात मेँ एक शर्मिली सी किरण।
जवाब देंहटाएंआँख मिचौली करती बादल के ओट मे जा छुपी॥
हम ढ़ूढ़ते रह गये इधर-उधर सारे जहाँ मेँ।
हमें आज तक तलाश है परन्तु मिल न सकी॥
॰सनुक यादव
चाँदनी रात मेँ एक शर्मिली सी किरण।
जवाब देंहटाएंआँख मिचौली करती बादल के ओट मे जा छुपी॥
हम ढ़ूढ़ते रह गये इधर-उधर सारे जहाँ मेँ।
हमें आज तक तलाश है परन्तु मिल न सकी॥
॰सनुक यादव
चाँदनी रात मेँ एक शर्मिली सी किरण।
जवाब देंहटाएंआँख मिचौली करती बादल के ओट मे जा छुपी॥
हम ढ़ूढ़ते रह गये इधर-उधर सारे जहाँ मेँ।
हमें आज तक तलाश है परन्तु मिल न सकी॥
॰सनुक यादव