मंगलवार, 27 जुलाई 2021

कविता

 -शिक्षा के नवदीप-

भोर भई अब उठो चलो,हो जाओ तैयार ।

शिक्षा के नवदीप जलायें, मिलकर एक बार ।।


ये भारत की माटी चंदन,यहां पावन धाम है ।

राम रहीम ईशा गुरु,गोविंद जैसे नाम है।।

भाईचारा स्नेह सहोदर,इसकी तो पहचान है। 

रंग बिरंगी है संस्कृति, रंगीन यहां परिधान है।। 

भिन्नता लिए मौसम चार,आए बार-बार........

शिक्षा के नवदीप जलायें, मिलकर एक बार ।।


नर्मदा क्षिप्रा गंगा यमुना,पावन इनका जल है।

अमृतमयी धारा इनकी,निर्झर बहती कल कल है।।

सोंधी खुशबू लिये हवा,बावन चले बयार है ।

स्वागत को तैयार लताएं,लिए फूलों के हार है।।

रामकृष्ण की पावन भूमि,नित होता वेदोंच्चार....

शिक्षा के नवदीप जलायें, मिलकर एक बार ।।


मंदिर मस्जिद गिरजाघर,या हो गुरुद्वार।

गीता कुरान बाइबिल,गुरु ग्रंथ का प्रचार।। 

खून का रंग एक ही,सबमें एक जान है। 

मिलकर बोलो एक बार,भारत मेरा महान है।। 

सदाचार और सद्विचार का,नित करें प्रचार...

शिक्षा के नवदीप जलाएं,मिलकर एक बार। 

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