✍🏻शिक्षा और संस्कार ✍🏻
हूँ मैं सरल लेकिन,इतना आसान नहीं ।
शिक्षा और संस्कार हूँ,दूसरा कोई पहचान नहीं ।।
श्रीराम का विश्वमित्र,तो गुरू वशिष्ट की वाणी हूँ ।
श्रीकृष्णा की सांदीपनी,और द्रोण की कहानी हूँ ।।
ममतामयी माटी के,रग-रग में संस्कार बसा ।
सदाचार और सदविचार का,करता संचार सदा ।।
वीर सहासी सुरता हूँ,कायरता का निशान नहीं ।
शिक्षा और संस्कार हूँ,दूसरा कोई पहचान नहीं ।।
पतित पावन ज्ञान की,त्रिवेणी रसधार हूँ ।
कालिदास कौटिल्य और,आर्यभट्ट का विचार हूँ ।।
सामवेद का नादभेद,सात स्वर का झंकार हूँ ।
ऋग्वेद की ऋचा और,मैं ही ब्रम्हज्ञान हूँ ।।
सत्य अहिंसा और मानवता हूँ,शुक्र का संस्कार नहीं ।
शिक्षा और संस्कार हूँ,दूसरा कोई पहचान नहीं ।।
✍️ सनुक लाल यादव
बालाघाट मध्य प्रदेश
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