रविवार, 14 नवंबर 2021

✍️ छुने दो आसमान✍️

       ✍️ छुने दो आसमान✍️

नदिया झूमे झरने गाते, पवन मंद मंद मुस्कुराते हैं।

शस्यशालिनी धरती में, भौरें गुन गुन गाते हैं।

सौंधी मिट्टी की खुशबू,है चंदन के समान

मन करता है आज ,मैं छू लू आसमान ।


पपीहा गाते  मोर नाचे,मधुर उपवन मतवाला है।

सरसराती सावन बरसे ,मानो मधुरस प्याला है।।

गड़गड़ाती बादल गरजे,दमकती दामिनी लाली है।

दादुर अपना कंठ खोलें ,जब होती रात मतवाली है।।

बलखाती नदियाॅ झुमें,विकराल गति अनजान।

मन करता है आज ,मैं छू लू आसमान ।

                          ✍️सनुक लाल यादव

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